बुधवार 21 जनवरी 2026 - 23:07
आयतुल्लाहिल उज़्मा मकारिम शिराज़ी के दृष्टिकोण से हालिया घटनाओ की समीक्षा

हौज़ा / हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा माकिरम शिराज़ी ने कहाः जो भी व्यक्ति या सरकार इस्लामी उम्मत और उसकी हाकेमीयत को हानि पहुंचाने के लिए सुप्रीम लीडर या मरजेईयत को धमकाए या (अल्लाह ना करे) उनपर कोई हमला करे, उसका हुक्म मुहारिब (अल्लाह और रसूल से युद्ध करने वाले) का है और मुसलमानो या इस्लामी सरकारो की ओर से उसका किसी भी प्रकार का समर्थन या सहायता करना हराम है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा माकिरम शिराज़ी ने कहाः जो भी व्यक्ति या सरकार इस्लामी उम्मत और उसकी हाकेमीयत को हानि पहुंचाने के लिए सुप्रीम लीडर या मरजेईयत को धमकाए या (अल्लाह ना करे) उनपर कोई हमला करे, उसका हुक्म मुहारिब (अल्लाह और रसूल से युद्ध करने वाले) का है और मुसलमानो या इस्लामी सरकारो की ओर से उसका किसी भी प्रकार का समर्थन या सहायता करना हराम है।

हज़रत आयतुल्लाह मकारिम शिराज़ी के दृष्णिकोण से हालिया घटनाओ की समीक्षा पर आधारित रिपोर्टः

बीते कुछ दिनो की घटनाओ ने हर दर्दे दिल रखने वाले व्यक्ति के दिल को दुखाया है। इस जनता ने अपनी आज़ादी और सम्मान के लिए भारी मूल्य अदा किया है और अब जबकि दुशमन पहले से कही अधिक गंभीरता से अपने खयाल मे इस धरती और उसकी जनता के हानि पहुचांने के लिए षडयंत्र रच रहा है, हमे पहले से कही अधिक अपनी एकता को बाकी रखना चाहिए अतः मै आप लोगो का ध्यान कुछ आवश्यक बिंदुओ की ओर आकर्षित कराना चाहता हूँ।

जनता की आर्थिक स्थिति, व्यवहारिक उपाय की मोहताज हैः 

इस समय मार्किट के हालात और जनता की अर्थ व्यवस्था मे मौजूद समस्याए सबको परेशान कर रही है। इस दौरान सरकार ने जनता की आर्थिक स्थिति मे मदद करने के लिए एक राशि की घोषणा की है जोकि एक अच्छा उपाय था लेकिन तुरंत बुनयादी सामान की धनराशि बंद कर दी गई जिसके कारण सभी चीज़ो पर प्रभाव पड़ा और जनता अधिक दबाव का शिकार हो गई। 

निसंदेह जनता की आर्थिक स्थिति, बेलगाम महंगाई और क़ीमतो मे ठहराव ना होना सामाजी अयोग्यता की बुनयादी कारणो मे से है, मजदूरो और वेतन पाने वालो के लिए भविष्य मे वेतन पाने वालो के साथ प्रतिदिन बढ़ती हुई कीमतो का सामना करना संभव नही है और यही समस्या प्रदर्शन का कारण बनता है। लेकिन सबको विशेष रूप से समाज के हर वर्ग के बुद्धिजीवीयो और प्रभावित लोगो को यह बात ध्यान मे रखनी चाहिए कि इस वैध प्रदर्शन को ग़लत इस्तेमाल का मार्ग ना दिया जाए।

दंगाईयो के चेहरे बे नक़ाबः

देश मे हालिया दंगो और आतंकवादी घटनाओ, दंगाईयो के चेहरे से नक़ाब उतर गया और इजराइल ने भी स्वीकार किया कि उसने दंगो मे भूमिका अदा की है।

निसंदेह मस्जिदो, सार्वजनिक स्थलो, व्यापारियो के घरो, बैंको और जनता की दूसरी सम्पत्तिया तबाह करने की किसी भी प्रकार का प्रयास इस्लामी निज़ाम और इस्लाम से युद्ध का एक रूप है।

अमेरिकी राष्ट्रपति का वहम और खयालः

अमेरिकी राष्ट्रपति वहम का शिकार है और ट्रम्प का उसल सरमाया झूठ बोलना है, ट्रम्प को इस्लामी निज़ाम के टूटने का वहम है, अमेरिकी राजनेताओ का ख्याल था कि आर्थिक दबाव के माध्यम से ईरान की जनता के सामने घुटने टेक देंगे और वार्ता की मेज पर आऐंगे लेकिन जनता ने सिद्ध किया कि यह उनका केवल एक वहम है। 

सुप्रीम लीडर का अस्तित्व हमारे अकीद़े का एक नाज़ुक और सहनशील पहलू हैः

शिया बल्कि पूरी इस्लामी उम्मत की रक्षा करने वाले के रूप मे सुप्रीम लीडर का अस्तित्व हमारे एक अक़ीदे का एक नाज़ुक और अत्यंत हस्सास बिंदु है और कोई भी सालेह और आज़ाद मुसलमान इस धमकी को सहन नही करेगा अतः ज़रूरी है कि सभी मुसलमान और आज़ाद खयाल लोग पूरी दुनिया मे हर मुमकिन तरीक़े से उनका समर्थन और उनके सिलसिले मे किसी भी प्रकार का दुसाहस की भरपूर निंदा करे ताकि दुशमन को ज्ञात हो सके कि मुस्लिम उम्मत उनके सामने खड़ी है।

मेरे प्रिय बेटोः दुशमन के एजेंटो को अपनी वैध मांगो से अवैध लाभ उठाने की अनुमति ना दो और उन्हे यह बहाना ना दो कि वह हमारे पवित्र स्थलो का अपमान करे, सार्वजनिक सम्पत्ति और मस्जिदो को तबाह करे, यहा तक के लोगो की निजि समपत्ति और उनके सुख और शांति पर भी हमला करें। आपको अपनी पंक्तियो को उनसे अलग करना चाहिए।

मेरे प्रियोः हम सबको मिलकर समस्याओ के समाधान के लिए एक दूसरे की मदद करना चाहिए ताकि शांति की रक्षा करने वाले सुख और शांति को समाज मे वापस ले आए। सीरिया और लिबी और उन जैसे दूसरे देशो की ओर देखे कि किस प्रकार उन्होने अपने सम्मान और शांति दोनो को खो दिया और बाहरी दुशमन उनपर ग़ालिब हो गया। याद रखे यह (बाहरी दुशमन) हमारे हमदर्द नही है बल्कि इस धरती को नुक़सान पहुंचाने और उसकी दौलत पर कब्ज़ा करने के प्रयास मे हैष

सभी इरानी जनता और कौमे चाहे तुर्क हो, कुर्द हो, लुर, अरब, फ़ार्स, ब्लूच या दूसरे जान ले कि केवल एक एकजुट और बलवान ईरान ही सब के सुख और शांति को निश्चित बना सकता है।

मुझे आशा है कि इन पवित्र दिन और रात (शाबान के महीने) मे यह देश और निज़ाम हज़रत वली अस्र (अ) की विशेष ध्यान की छत्र छाया मे और जनता और जिम्मेदार के मार्गदर्शन के साथ सभी बदखाहो के नुक़सानात से सुरक्षित रहेगा। इंशाल्लाह

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